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भारत की आजादी के 70 साल बाद मुंबई के इस गांव में आई बिजली

एक बार सुनकर आपको यकीं न हो लेकिन मुंबई जैसे शहर में इस दौर में भी ऐसा हो रहा है। अदानी इलेक्ट्रिसिटी ने 2 करोड़ रुपया खर्च करके लगभग डेढ़ किमी लंबी भूमिगत केबल डाल कर यहां के लोगों को बिजली मुहैया कराइ है।

भारत की आजादी के 70 साल बाद मुंबई के इस गांव में आई बिजली
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मुंबई को ऐसे ही मायानगरी नहीं कहा जाता, यहां ऊंची-ऊंची बिल्डिंगें, सड़कों पर दौड़ती गाड़ियां, बिजली की रौशनी में नहाया हुआ शहर, देखते ही आंखें चौधियां जाती हैं। लेकिन इस मुंबई का एक दूसरा पहलू भी है जिसे सुन कर एक बारगी आपको यकीन नहीं होगा। मुंबई के गोराई से 2 किमी दूर एक गाँव  है झामझड़ पाड़ा। यहां के लोगों के लिए 3 मई 2019 का दिन ऐतिहासिक रहा, इस दिन को शायद हो ये लोग कभी भूलेंगे। क्योंकि भारत की आजादी के 70 साल बाद इस गांव के लोगों के घरों में बिजली पहुंची है।जी हां, एक बार सुनकर आपको यकीं न हो लेकिन मुंबई जैसे शहर में इस दौर में भी ऐसा हो रहा है। अदानी इलेक्ट्रिसिटी ने 2 करोड़ रुपया खर्च करके लगभग डेढ़ किमी लंबी भूमिगत केबल डाल कर यहां के लोगों को बिजली मुहैया कराइ है।

क्या था मामला?
बता दें कि इस झामझड़ पाड़ा में 52 लोगों का परिवार रहता है। यह परिवार 70 सालो से अंधेरे में रहने का दंश झेल रहा था। ऐसा नहीं है कि यहां के लोगों ने बिजली के लिए कभी निवेदन नहीं दिया हो या किसी से मिले नहीं हो। दरअसल यहां बिजली पहुंचाने के लिए खर्च प्रक्रिया काफी बड़ा था। इसीलिए यहां एक बिजली केंद्र स्थापित किये जाने का निर्णय किया गया। लेकिन बिजली केंद्र स्थापित करने के लिए जमीन चाहिए थी, जबकि जिलाधिकारी के यहां से यहां की जमीन पर बिजली केंद्र बनाने की मंजूरी नहीं मिल रही थी।  

70 साल बाद घर हुआ रोशन
आखिरकार छह महीने पहले अदानी को यहां बिजली केंद्र स्थापित करने की मंजूरी मिली। मंजूरी मिलने के बाद भूमिगत केबल डालने का कम शुरू हुआ। यह केबल गोराई से झामझड़ पाड़ा तक यानी 2 किमी तक डाला गया। केबल डालने के बाद अदानी की तरफ से रामभाऊ म्हालगी प्रबोधन के करीब ही बिजली केंद्र भी स्थापित किया गया। और जब सभी काम पूरा कर लिया गया तो शुक्रवार 3 मई को यहां के 52 परिवार वालों में से 48 परिवार वालों के घरों ने जीवन में पहली बार बिजली के रोशनी का आनंद लिया। 

अदानी के कर्मचारियों के मुताबिक सुरक्षा के मद्देनजर चार घरों को अभी कनेक्शन नहीं दिया गया है लेकिन जल्द ही उनके यहां भी कनेक्शन दे दिया जाएगा।

इस तरह मनाई ख़ुशी
यही नहीं यहां के घरों में जब लाईट जली तो यहां के लोगों ने ढोल ताशा बजा कर, नाच गा कर, एक दुसरे को मिठाई खिला कर ख़ुशी मनाई। 

35 वर्षीय यहां के स्थानीय निवासी चंदु गोपाल का कहना है जब से मैंने जन्म लिया है तब से मैं दिये की रौशनी में दिन और रात बिताए हैं. यह पहली बार है कि मेरे घर में लाइट जल रही है.


इसी गांव की एक महिला सुषमा दावडे का कहना है कि बिजली की रौशनी से जगमगाने वाली मुंबई को देख कर यही लगता था कि, काश हमारे गाँव में भी बिजली होती मेरे घर में भी उजाला होता. लेकिन पिछले डेढ़ साल से किया जा रहा हमारा प्रयास सफल रहा और कई सालों के अंधेरे से आखिर हमने छुटकारा पा ही लिया. 


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