हिंदी और उर्दु मिडियम में बढ़ रही है छात्रों की संख्या!


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जहां एक ओर बीएमसी के मराठी स्कूलों में छात्रों की संख्या दिन बा दिन कम होती जा रही है तो वही दूसरी ओर हिंदी औऱ उद्रु माध्यम में छात्रों की संख्या बढ़ती जा रही है। नि: शुल्क और अनिवार्य शिक्षा अधिनियम के तहत, 6-14 साल के बच्चों को प्राथमिक शिक्षा देना अनिवार्य है। प्राथमिक शिक्षा को चाथी से बढ़ाकर इस बार आठवी तक कर दिया गया है।

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कई स्कूलों में सातवी तक की क्लास को आठवी तक कर दिया गया और चौथी की कक्षाओं को पांचवी तक बढ़ा दिया गया है। पिछले शैक्षणिक वर्ष में, कक्षा 5 वीं में मराठी के साथ अंग्रेजी, गुजराती और तेलुगु माध्यमिक विद्यालयों में एक बच्चे ने भी प्रवेश नहीं लिया।

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आठ भाषिक शाला में आठवी की क्लास में 125 वर्ग शुरु किये गए। मराठी माध्यमिक विद्यालयों के 25 स्कूलों में आठवीं कक्षाएं खोली गईं। जिसमें 27 9 3 छात्रों ने प्रवेश लिया था। हिंदी के 30 माध्यमिक विद्यालयों की 8 वीं कक्षा में अधिकांश 8008 छात्रों को प्रवेश लिया। इसके अलावा, उर्दू माध्यमिक विद्यालयों के 18 स्कूलों में 4292 छात्र और अंग्रेजी के 8 स्कूलों में 8,298 बच्चे भर्ती हुए हैं।

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