स्ट्रगल से लेकर रजनीकांत के साथ तक की कहानी!

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स्ट्रगल से लेकर रजनीकांत के साथ तक की कहानी!

सिनेमा से इनका दूर दूर तक कोई नाता नहीं था। बहुत से ऐसे लोग होते हैं जिन्हें पता नहीं होता उन्हें करना क्या है? उनमें से ये भी एक थे। पढ़ाई में अधिक रुचि ना होने के चलते ड्रामा की ओर इनका आकर्षण इन्हें गैंग्स ऑफ वासेपुर का सुल्तान बना देता है। पर यह राह इतनी आसान नहीं थी। जिस तरह से रेलवे का कंफर्म टिकट पाने के लिए लोग रात भर लाइन में खड़े रहते हैं। उसी तरह बॉलीवुड एक्टर पंकज त्रिपाठी भी डायरेक्टर्स के घर के सामने सालों खड़े रहे। पर जब निकले तो कंफर्म टिकट लेकर ही निकले। पंकज से हमने खास बातचीत की है। तो चलो जानते हैं उनकी कहानी के उतार चढ़ाव के साथ साथ सुपर स्टार रजनीकांत तक के साथ काम करने के सफर के बारे में।


बिहार के छोटे से गांव का पंकज कैसे बना बॉलीवुड एक्टर?

राहें आसान तो नहीं थी, पर हां राहों को आसान बानाने की क्षमता थी। सिनेमा से मेरा दूर दूर तक कोई नाता नहीं था। मैं बिहार के ऐसे गांव से हूं जहां एक समय तक बिजली भी नहीं थी। डॉक्टरेट की पढ़ाई करने के लिए दिल्ली आया, पर ड्रामा ने मुझे अपना बनाया और मैंने भी इसे लगेहाथ अपनाया। पर ड्रामा से एक परिवार का पेट भी नहीं भरा जा सकता। मेरी यही भूख मुझे मुंबई खीच लाई।

मुंबई में सर्वाइव करना आसान तो नहीं है, पर जिसने बचपन से ही स्ट्रगल किया हो, उसके लिए स्ट्रगल स्ट्रगल नहीं होता। इस दौरान थियेटर, सीरियल्स और फिल्मों में छोटे मोटे किरदार निभाए। पर असली पहचान फिल्म गैंग्स ऑफ वासेपुर ने दिलाई। इस फिल्म के बाद लोगों ने सुल्तान(पंकज त्रिपाठी) को गूगल पर सर्च करना शुरु किया। स्ट्रगल के 7 सालों के दौरान पत्नी का सपोर्ट भरपूर मिला।    


बॉलीवुड के परिवारवाद पर राय?


हमारे देश में हम जैसे एक्टर को तभी लोग सर्च करना शुरु करते हैं। जब हममें बहुत ही ज्यादा टैलेंट दिखने लगता है। वहीं जो बड़े एक्टर, एक्ट्रेस के बच्चे होते हैं, उन्हें फिल्मों में आने से पहले ही पब्लिकसिटी मिलनी शुरु हो जाती है। एयरपोर्ट में ये हीरो के लड़के दिख गए, बांद्रा में उस हीरोइन की बेटी दिख गई, और यह सब अखबारों में प्रकाशित होता है। मैं भी यहीं रहता हूं पर मुझे तो किसी ने नहीं देखा।


सुपर स्टार रजनीकांत के साथ फिल्म करने का अनुभव और हिमालय वाली बात?

उनके साथ फिल्म में काम करने का अनुभव बेहद ही सुखद और आध्यात्मिक रहा है। मैंने रजनीकांत जी के साथ 'काला कालीकरण' फिल्म बस इसलिए की थी क्योंकि मैं उनसे बात करना चाहता था और उनके बारे में जानना चाहता था। मैंने सुना था कि हरेक फिल्म को पूरा करने के बाद वे एक महीने के लिए हिमालय चले जाते हैं जो सच है। साथ ही उन्होंने हिमालय के बारे में भी बताया। उन्होंने बताया कि हिमालय सिर्फ एक पर्वत नहीं है दिल की नजरों से देखने पर बहुत कुछ दिखता है।  


'काला कालीकरण' साउथ की फिल्म है, भाषा को लेकर परेशानी?

निश्चित रूप से परेशानी तो हुई है और शायद से मैं अब खासकर तमिल, तेलगू फिल्मों में काम नहीं करूंगा। हिंदी स्पीकिंग कैरेक्टर रहेगा तभी करूंगा। अगर भाषा के चलते मैं फिल्म में वो नहीं दे पा रहा हूं जो मैं देना चाहता हूं, तो मुझे अच्छा नहीं लगता।


रजनीकांत से आपने क्या सीखा?

शब्दों में बयां कर पाना मुश्किल है कि मैंने उनसे क्या सीखा है। हमने 5 दिनों तक साथ मैं शूट किया। हो सकता है जो मैंने उनसे सीखा है वह आज से 2 साल बाद मेरी फिल्म, एक्टिंग में आपको देखने को मिले। क्योंकि मैंने उनसे जो भी सीखा वह बेहद ही आध्यात्मिक है।


नवाजुद्दीन के साथ काम करने का अनुभव?

नवाजुद्दीन सिद्दकी के साथ काम करने का गजब का अनुभव रहा है। एक बार फिर मुन्ना माइकल में हम दोनों साथ में काम कर रहे हैं। जब भी हम मिलते हैं, तो काम के बारे में ही बातें करते हैं। और यह काफी अच्छा भी लगता है।


आपकी तरह ही बहुत से युवा मुंबई एक्टर बनने की चाहत लिए आते हैं, उन्हें क्या मेसेज देंगे?

मुंबई पर सर्वाइव कर पाना आसान नहीं हैं। अगर आपके अंदर पैशन, ईमानदारी और धीरज है तो सफलता मिलना तय है। थोड़ा वक्त जरूर लग सकता है। क्योंकि हमारे देश में ट्रेन का टिकट भी रातभर लाइन में लगने के बाद कंफर्म मिलता है। पर बहुत से लोग सिर्फ पैशन लेकर आ जाते हैं। तो मैं उनको बता दूं कि सिर्फ पैशन से काम नहीं चलता कड़ी मेहनत भी करनी होती है।


आगामी फिल्में?

मुन्ना माइकल, काला कालीकरण, गुड़गांव, बरेली की बर्फी और न्यूटन हैं।


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