लावणी कार्यशाला का आयोजन

बांद्रा - लावणी को महाराष्ट्र के सबसे लोकप्रिय और प्रसिद्ध लोक नृत्य शैली के रूप में जाना जाता है। लावणी नृत्य की विषय-वस्तु कहीं से भी ली जा सकती है, लेकिन वीरता, प्रेम, भक्ति और दु:ख जैसी भावनाओं को प्रदर्शित करने के लिए यह शैली उपयुक्त है। संगीत, कविता, नृत्य और नाट्य सभी मिलकर लावणी बनाते हैं। महाराष्ट्र में विभिन्न प्रकार के लोक नृत्य किए जाते हैं, किंतु इन नृत्यों में लावणी नृत्य सबसे ज़्यादा प्रसिद्ध लोक नृत्य है। लेकिन अब लावणी नृत्य सिर्फ महिलाओं तक ही सीमित नहीं रह गया है। 28 वर्षीय महेश जो कि आईटी प्रोफेशनल हैं लावणी नृत्य की बारीकियों को सीख रहे हैं। संगीतबारी के भूषण कोरगांवकर द्वारा आयोजित दो दिवसीय लावणी नृत्य कार्यशाला में प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। संगीत नाटक अकादमी विजेता शकुंतला नागरकर द्वारा कार्यशाला में प्रतिभागियों को लावणी नृत्य की कला सिखाई गई। इस कार्यशाला का आयोजन बांद्रा में हुआ जिसमें प्रत्येक व्यक्ति पर 2000 रुपए फीस रखी गई थी। इसमें प्रतिभागियों को लावणी के कला इतिहास के साथ सिद्धांत से भी परिचित करवाया गया।

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