कांता मगरे ने मर कर भी बचाई दो लोगों की जान

अंगदान के महत्व को इसी से समझा जा सकता है कि एक 45 वर्षीय महिला ने मर कर भी दो अंगदान के जरिये लोगों की जान बचाई।

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अंगदान को महादान कहा जाता है। भारतीय समाज में अंगदान को लेकर बही भी जागरूकता कम है। अंगदान के महत्व को इसी से समझा जा सकता है कि एक 45 वर्षीय महिला ने मर कर भी दो अंगदान के जरिये लोगों की जान बचाई।  


क्या था मामला?
जानकारी के मुताबिक ठाणे में एक दुर्घटना के दौरान एक महिला कांता मगरे बुरी तरह से घायल हो गयीं थीं। काफी खून बह जाने के कारण इन्हे नजदीकी के इंदिरा गांधी हॉस्पिटल में दाखिल कराया गया। लेकिन हालत गंभीर होने के बाद इन्हे एसएस अस्पताल रेफर कर दिया गया।

लेकिन एसएस अस्पताल में सिटी स्कैन की सुविधा नहीं होने के कारण कांता मगरे को नौपाड़ा के ज्यूपिटर अस्पताल दाखिला कराया गया, अचेत कांता का जब डॉक्टरों ने ब्रेन स्कैनिंग किया तो डॉक्टरों ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया। आख़िरकार 4 दिन बाद कांता को मृत घोषित कर दिया गया।

कांता को मृत घोषित करने के बाद उनके परिजनों ने कांटा का अंगदान करने का निर्णय किया।  ज्यूपिटर अस्पताल के अनिरुद्ध कुलजारणी ने मगरे परिवार को अंगदान के बारे में सारी जानकारी दी। इसके बाद मगरे परिवार ने कांता का ह्रदय और लिवर दान कर दिया।

कांता मगरे का दिल सूरत में रहने वाले एक 59 वर्षीय वृद्ध को लगाया गया तो लिवर श्रीनगर के एक 56 वर्षीय वृद्ध व्यक्ति को लगाया गया। कांता के इस अंगदान से उसके परिवार वाले बेहद ही खुश हैं।

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