मेट्रो-3: शिवसेना भवन के यहां 2.5 किमी लंबा टनल बना कर जुड़वां TBM मशीनें निकली बाहर

आपको बता दें कि मेट्रो-3 अंडरग्राउंड होगा, इस काम के लिए जमीन के अंदर ही 52 किमी लंबा टनल बनाया जा रहा है, जो कि इंसानों के बस का काम नहीं है। इस काम को करने के लिए विदेशों से टीबीएम मशीनों को लाया गया है।

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कुलाबा-बांद्रा-सिप्ज अंडरग्राउंड मेट्रो-3 का काम काफी तेजी से चल रहा है। मेट्रो-3 के काम में अब तक काम कर रही दो टीबीएम मशीनें जमीन से बाहर आ चुकीं हैं। लेकिन गुरूवार को जुड़वां टीबीएम मशीनें यानी एक साथ दो टीबीएम मशीनें टनल बना कर एक ही साथ बाहर निकली। ये दोनों टीबीएम मशीनें शिवसेना भवन के यहां चल रहे काम वाले साईट पर बाहर आईं।


चार महीने तक जमीन के अंदर
इन दोनों मशीनों को माहिम ,नया नगर के लांचिंग शाफ़्ट से जमीन के अंदर छोड़ा गया था। इन दोनों मशीनों के नाम कृष्णा-1 और कृष्णा-2 है। ये मशीनों 2490 मीटर लंबे अंडरग्राउंड टनल का काम पूरा करके गुरूवार की सुबह दादर के शिवसेना भवन के यहां चल रहे काम वाले साईट पर बाहर निकली।

कृष्णा-1 को पिछले साल 21 सितंबर को तो कृष्णा-2 को 18 अक्टूबर को जमीन के अंदर छोड़ा गया था। इन दोनों मशीनों ने चार महीने तक जमीन के अंदर काम करके 10 से 12 मीटर व्यास का टनल बनाया।


इस मौके पर MMRC की व्यवस्थापिका संचालिका अश्विनी भिड़े ने कहा कि, 'एक ही समय पर दो टीबीएम मशीने टनल बना कर  बाहर सफलतापूर्वक बाहर निकली हैं। मैं इसका श्रेय हमारी पूरी टीम को देती हूं।'

अब तक चार मशीनें आ चुकीं हैं बाहर
इसके पहले पिछले साल 24 सितंबर को अंधेरी के पाली मैदान से एयरपोर्ट तक कम करने वाली वैनगंगा नामकी टीबीएम मशीन 1.26 किमी लंबा टनल बना कर सबसे पहले जमीन से बाहर निकली थी। इसके बाद सारीपुत से सिप्ज 567 मीटर का काम करके सिप्ज की साईट पर 26 दिसंबर के दिन काम करके बाहर आई थी और इसके बाद अब कृष्णा-1 और कृष्णा-2 ये दोनों टीबीएम मशीनें बाहर आई हैं।

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विदेशों से मंगाया गया है मशीनों को 
आपको बता दें कि मेट्रो-3 अंडरग्राउंड होगा, इस काम के लिए जमीन के अंदर ही 52 किमी लंबा टनल बनाया जा रहा है, जो कि इंसानों के बस का काम नहीं है। इस काम को करने के लिए विदेशों से टीबीएम मशीनों को लाया गया है। इन मशीनों को जमीन के अंदर छोड़ा गया हैं।सिप्ज-बांद्रा-कुलाबा (मेट्रो-3) के अलग-अलग स्थानों पर टनल बनाने के लिए जमीन के अंदर कुल 17 टीबीएम मशीनें छोड़ी गयी हैं. जिसमें से अपना काम करके अब तक 4 टीबीएम मशीनें बाहर आ चुकीं हैं। ये मशीनों अब तक 18 किमी लंबा टनल बना चुकी हैं।

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