भारतीय रेल गाड़ीयों में कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा !


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भारतीय रेल से हर महीने लगभग दस करोड़ टन माल (सामान) ढुलाई किया जाता है मगर रेलवे के द्वारा जो माल पार्सल किया जाता है उस पार्सल को सुरक्षा की दृष्टी से स्कैन अथवा जाँच करने के लिए पार्सल केन्द्रों पर कोई व्यवस्था नहीं है ऐसी जानकारी पश्चिम रेल की सुचना अधिकारी एवं वरिष्ट मंडल वाणिज्य प्रबंधक, श्रीमती आरती सिंह परिहार ने आरटीआय कार्यकर्ता शकील अहमद शेख को सुचना अधिकार अधिनियम के तहत उपलब्ध कराई है।


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आरटीआय कार्यकर्ता शकील अहमद शेख ने पश्चिम रेल और मध्य रेल के मुख्य कार्यालय से मुंबई के मुंबई सेन्ट्रल, बांद्रा टर्मिनस, बोरीवली, सीएसटी, दादर लोकमान्य तिलक टर्मिनस, ठाणे और कल्याण रेलवे स्टेशनों पर पार्सल किये जाने वाले माल (सामान) को सुरक्षा की दृष्टी से स्कैन या जाँच करने की पार्सल केन्द्रों पर क्या व्यवस्था है? तथा पार्सल केन्द्रों पर सुरक्षा की दृष्टी से स्कैनर लगाने की जिम्मेदारी किसकी है? एवं पार्सल को सुरक्षा की दृष्टी से स्कैन या जाँच करने हेतु क्या नियमावली है? एवं पार्सल ठेकेदार का नाम एवं ठेका आवंटन संबधित जानकारी मांगी थी. इस सन्दर्भ में पश्चिम रेल की सुचना अधिकारी एवं वरिष्ट मंडल वाणिज्य प्रबंधक, श्रीमती आरती सिंह परिहार ने शकील अहमद शेख को जानकारी उपलब्ध कराईं है ।

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जानकारी के अनुसार मुंबई सेन्ट्रल, बांद्रा टर्मिनस और बोरीवली स्टेशन पर पर्सेल को सुरक्षा की दृष्टी से स्कैन और जाँच करने हेतु वर्तमान में कोई व्यवस्था नहीं है. तथा पार्सल केन्द्रों पर सकैनेर लगाने की जिम्मेदारी वाणिज्य विभाग की है. एवं पार्सल को सुरक्षा की दृष्टी से स्कैन या जाँच करने हेतु वर्तमान में नियमावली प्रस्तावित है। एवं पार्सल लिए कुछ गाड़ियों में ठेका दिया गया है. वहीं मध्य रेलवे के सुचना अधिकारी ने सुचना देने से मना कर दिया है।

आरटीआय कार्यकर्ता शकील अहमद शेख के अनुसार भारतीय रेल जहाँ एक तरफ सुरक्षा की दृष्टी से रेलवे स्टेशन के परिसर में दाखिल होने के लिए यात्रियों को मेटल डिटेक्टर मशीन से गुजरना पड़ता है और यात्रियों को अपने माल (सामान) को स्कैनर मशीन में डालना पड़ता है। वहीं दूसरी तरफ रेलवे हर महीने करोडो टन माल (सामान) पार्सल को बिना किसी जाँच अथवा स्कैन किये हुए विभिन्न रेलगाड़ीयों के माध्यम से एक शहर से दुसरे शहर माल ढुलाई करता है। अगर कोई आतंकवादी संघटन इतनी बड़ी रेल सुरक्षा खामी के कारण कोई विस्फोटक वस्तु (बम) पार्सल करके किसी बड़ी आतकंवादी गतिविधि को अंजाम देता है, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा ? क्यूँ आज तक रेलवे प्रशासन ने पार्सल केन्द्रों पर स्कैनर नहीं लगाया ? क्यूँ आज तक रेलवे प्रशासन ने पार्सल केन्द्रों पर सुरक्षा की दृष्टी से माल (सामान) की स्कैनिग या जाँच करने के लिए कोई नियम नहीं बनाया ? क्या रेलवे प्रशासन किसी बड़ी घटना होने का इन्तेजार कर रहा है ? इस सन्दर्भ में शकील अहमद शेख ने रेलमंत्री पियूष गोयल और रेल्वे बोर्ड चेयरमैन अश्वनी लोहानी को पत्र लिखकर सभी पार्सल डिपो पर स्कैनर लगाने की मांग की है। और साथ ही साथ अन्य सुरक्षा की दृष्टी से पर्यायाई एवं ठोस कदम उठाने की मांग की है।

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