...तो क्या आम जनता वाकई आम है?


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बीएमसी के अस्पतालों में अच्छे इलाज की उम्मीद लेकर जानेवाली आम जनता को भले ही काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता हो, लेकिन जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों को हमेशा से ही जनता से ऊपर रखा जाता है। जनता द्वारा ही चुने गए इन प्रतिनिधियों को बुनियादी सुविधाओं के मामले में जनता से आगे रखा जाता है और आम जनता तो बस धक्के खाते रह जाती है।

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केईएम अस्पताल के डीन डॉ अविनाश सुपे ने भी एक ऐसा ही आदेश जारी करते हुए अस्पताल प्रशासन से कहा है कि अस्पताल में नगरसेवको, महापौर, समितियों के अध्यक्ष और गटनेताओं को अस्पताल की सेवाओं में प्राथमिकता दी जाए। डीन की ओर से जारी आदेश में लगभग 40 वीआईपी लोगों के नाम शामिल हैं, जिनसे महापौर, समितियों के अध्यक्ष, नगरसेवकों के नाम शामिल हैं।

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डॉ अविनाश सुपे ने मुंबई लाइव से बात करते हुए ये जानकारी दी कि ये सर्कुलर काफी पुराना है और उन्होंने इसे सिर्फ फिर से जारी किया है। ऐसे में अब सवाल ये उठता है कि जिन सरकारी अस्पतालों में आम जनता को इलाज के लिए इस विभाग से उस विभाग दौड़ाया जाता है ऐसे ही सरकारी अस्पतालों में क्या जनप्रतिनिधियों को इस तरह जनता से ऊपर रखना सही है।

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