लवाटे दंपति ने वापस ली इच्छामृत्यु की अर्जी


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राष्ट्रपति को खत लिख इच्छामृत्यु देने की मांग कर चर्चा में आने वाले मुंबई के लवाटे दम्पत्ति ने अब अपनी मांग वापस ले ली है। अब इनका कहना है कि इच्छापूर्वक मरने से अच्छा है जैसी हमारी किस्मत में मौत लिखी होगी हमे वैसा ही मंजूर है, हमने अपना विचार बदल लिया है। 


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नहीं है कोई देखभाल करने वाला 

आपको बता दें कि नारायण लवाटे और उनकी पत्नी इरावती लवाटे घर के अकेले रहते हैं।इन्होने राष्ट्रपति से खत लिख करा मांग की थी कि बुढ़ापे में हमारी देखभाल करने वाला कोई नहीं है, बुढ़ापे में तिल-तिल कर मरने से अच्छा है हमें इच्छामृत्यु दी जाए।


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जान से मारने की भी दी थी अर्जी 

मुंबई के गिरगांव में स्थित ठाकुर चॉल में रहने वाले लवाटे दंपत्ति का कहना था कि हम जीवन भर एक दूसरे के साथ रहे, इसीलिए अब साथ में मरना भी चाहते हैं। लवाटे दंपत्ति अपनी मांग मनवाने के लिए पिछले 30 साल से राष्ट्रपति के साथ पत्र व्यवहार कर रहा था लेकिन   जब कोई उत्तर नहीं आया तो नारायण लवाटे ने अपनी पत्नी इरावती लवाटे को जान से मारने के लिए पत्र लिखा। लवाटे ने लिखा था कि अगर उनकी मांग नहीं मानी गयी तो वे दोनों खुद एक दूसरे की हत्या कर देंगे।
 
 86 साल के नारायण लवाटे अकॉउंटेंट तो 79 साल की इरावती लवाटे शिक्षिका के पद पर कार्यरत थीं। लेकीन अब लवाटे दंपति ने अपनी इच्छा वापस ले ली है।

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