जन्मदिन विशेष - आवाज के सौदागर आर.डी बर्मन की सात अनकही बातें

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    जन्मदिन विशेष - आवाज के सौदागर आर.डी बर्मन की सात अनकही बातें
    मुंबई  -  

    हिंदी फिल्मी दुनियां में अपनी आवाज से लोगो को कायल करनेवाले संगीतकार आर. डी. बर्मन का मंगलवार को जन्मदिन है। 27 जून 1939 को कोलकत्ता में उनका जन्म हुआ। फिल्म शोले के मशहुर गाने महबूबा ओ महबूबा से उन्होने फिल्मी दुनिया के साथ साथ लोगों के दिलो में भी एक अलग से पहचान बनाई।
    आर.डी बर्मन ने अपने करियर में लगभग 300 फिल्मों में संगीत दिया था। हिन्दी फिल्मों के अलावा बांग्ला , तेलुगु, तमिल, उडिया और मराठी फिल्मों में भी संगीत दिया है।

    आरडी बर्मन के बारे हम आपको बताने जा रहे है ऐसी सात बातें जो आपने अभी तक नहीं सूनी होंगी-

    शाही वंश
    आरडी बर्मन त्रिपुरा के शाही परिवार के तालुक्क रखते थे। वह कलकत्ता में पैदा हुए थे और प्यार से उन्हे तबलू कहा जाता था। अपने जमाने के मशहूर अभिनेता अशोक कुमार ने उन्हे पंचम नाम दिया।

    9 साल में बनाया पहला गाना
    आर.डी.बर्मन जब नौ साल के थे , तब उन्होने अपना पहला गाना 'अरे मेरी टोपी पलट कर आजा" बनाया। जिसे उनके पिता ने फिल्म फंटुश (1956) में इस्तेमाल किया था। । "सर जो तेरा चकराए" गाना भी उन्होने कम उम्र में ही बना दिया था। जिसे उनके पिता ने गुरु दत्त कि फिल्म प्यासा ( 1957) के साउंडट्रैक में शामिल किया था।

    संगीत वाद्ययंत्र के लिए शुर से लगाव
    आरडी को शुरु से ही संगीत से लगाव था। फिल्म सोलवा साल के गाने है अपना दिल तो आवार में उन्होने खुद ही माउथ ऑर्गन बजाया था।

    'आराधना' पूरी तरह पंचमदा की रचना 

    एक स्वतंत्र संगीत संगीतकार के रूप में पांचमदा ने फिल्म 'छोटा नवाब' (1961) मे काम किया। हालांकी उन्होने ने 1959 में गुरु दत्त के साथ फिल्म राज़ से काम करने की इच्छा जताई थी। लेकिन छोटा नवाब में काम कतरने के बाद से उन्होने कभी भी पिछे मुड कर नहीं देखा।

    आवाज के जादूगर

    आरडी बर्मन पश्चिमी, लैटिन, ओरिएंटल और अरबी संगीत से काफी प्रभावित थे। उन्होंने सैंड पेपर को रगड़ने और बांस की छड़ियो से आवाज निकाले के तरीके से का भी उन्होने प्रयोग किया। उन्होंने 'मेहबूबा, मेहबूबा' के शुरुआती धूनों के लिए बीयर की बोतलों का भी सहारा लिया।

    फिल्म के लिए लिखे अंग्रेजी गाने
    उन्होंने 1975 में आई फिल्म दिवार के लिए एक अंग्रेजी गाना भी लिखा। जिसे एक महत्वपूर्ण दृश्य के दौरान फिल्माया गया। इस सीन में जहां अमिताभ बच्चन पहली बार परवीन बाबी से मिलते और उसके साथ ही दृश्य के पृष्ठभूमि में ये अंग्रेजी गाना बजता है।

    वास्तविक जीवन से प्रभावित
    1972 की फिल्म 'परिचय' का गाना 'मुसाफिर हूं यारों' का गीत पंचाम दा द्वारा गाया गया था जब वह अपनी पहली पत्नी रीता पटेल से अलग होने के बाद होटल में थे।


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