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मुंबई : 50 फीसदी अस्पतालों में जरूरी फायर सेफ्टी मानदंड पूरे नहीं

बृहन्मुंबई म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन (BMC) ने मुंबई के 1324 सरकारी और गैर सरकारी अस्पतालों का एक फायर ऑडिट (fire audit) किया था।

मुंबई : 50 फीसदी अस्पतालों में जरूरी फायर सेफ्टी मानदंड पूरे नहीं
(Representational Image)
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मुंबई (mumbai) में आए दिन आग (fire)लगने की खबरें सामने आती रहती हैं। इसी बीच इसी से संबंधित एक चौकानें वाली खबर सामने आई है।खबरों के मुताबिक, मुंबई में 50 फीसदी से ज्यादा अस्पतालों और नर्सिंग होम में जरुरी फायर सेफ्टी मानदंडों को नहीं अपनाया गया है।

बृहन्मुंबई म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन (BMC) ने मुंबई के 1324 सरकारी और गैर सरकारी अस्पतालों का एक फायर ऑडिट (fire audit) किया और यह पाया कि इनमें से करीब 701 अस्पताल (hospital), नर्सिंग होम (nursing home) और मैटरनिटी होम में महाराष्ट्र अग्नि निवारण और जीवन सुरक्षा उपाय अधिनियम, 2006 के तहत बनाये गए जरूरी नियमों का पालन नहीं करते हैं। इनमें से 38 अस्पताल तो राज्य सरकार और बीएमसी द्वारा संचालित हैं।

राज्य के शहरी विकास मंत्री एकनाथ शिंदे (eknath shinde) ने मंगलवार, 2 मार्च को विधानसभा में एक प्रश्न के लिखित जवाब में बताया कि अस्पतालों के प्रबंधन को तमाम खामियों की जांच करने और अग्नि सुरक्षा सभी जरूरी मानदंडों का पालन करने के लिए कहा गया है।  

जनवरी महीने में महाराष्ट्र (maharashtra) के भंडारा (bhandara fire incident) जिले में एक चाइल्ड अस्पताल में लगी आग की घटना के मद्देनजर अतुल भातखलकर, अबू आजमी, यामिनी जाधव, देवेंद्र फड़नवीस और कई अन्य लोगों ने संयुक्त रूप से अस्पतालों में फायर ऑडिट के बारे मे शहरी विकास मंत्री से इस बाबत प्रश्न पूछा था।

बता दें कि भंडारा आग घटना में दस शिशुओं की मौत हो गई। जिसके बाद घटना को संज्ञान में लेते हुए, मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (uddhav thackeray) ने पूरी जांच का आदेश दिया था साथ ही उन्होंने राज्य भर के सभी सरकारी अस्पतालों के फायर और स्ट्रक्चरल ऑडिट का भी आदेश भी दिया था।

यहां तक कि शिवसेना के विधायक संजय पोतनिस (sanjay pontos) ने भी राज्य सरकार से अपील की कि वे उन सभी मुंबई के अस्पतालों में फायर और स्ट्रक्चरल ऑडिट की जांच करवाएं और जिन्होंने सुरक्षा संबंधी नियमों की धज्जियां उड़ाईं हैं।

मंत्री ने कहा कि ठाणे में 347 अस्पतालों का ऑडिट किया गया था जिनमें से 28 अस्पतालों को लापरवाही बरतने के लिए बंद करने के लिए कहा गया है, जबकि 151 अस्पतालों ने अपनी ऑडिट रेपोर्ट पेश की है, जबकि शेष 168 को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए 22 फरवरी तक का समय दिया गया है।

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