विधानसभा में बीएमसी ने विधायक को दी नकली जानकारी

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मुंबई  -  

विधानमंडल में विधायको द्वारा मांगी गई जानकारी का सही -सही जवाब देना सरकारी विभागो से अपेक्षित होता है। कई बार या तो विधायको को जानकारी नहीं दी जाती या फिर कई बार जानकारी देने में आनाकानी की जाती है ,कई बार जानकारी छुपा भी दी जाती है। ऐसे ही एक जानकारी मुंबई लाइव के हाथ लगी है। एनसीपी के विधायक संजय कदम ने मुंबई के चेंबूर स्थित बीएमसी स्कूल में 8वीं तक की शिक्षा व्यवस्था ना होने के कारण 2013-14 में 75 गरीब बच्चों को स्कूल छोड़ना पड़ा। जिनमे से चार बच्चों की आर्थिक स्थिती खराब होने के कारण उन्हे आगे की पढ़ाई छोड़नी पड़ी। जब इस बारे में विधानसभा में साल 2016 में सवाल पुछा गया तो बीएमसी ने ऐसे किसी भी तरह की घटना होने से इंकार कर दिया।

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क्या है पूरा मामला-
राइट टू एजुकेशन साल 2010 में लागु हुआ था। इस एक्ट के कानून 2(H) में सेक्शन 6 के तहत सभी बच्चों को आठवी तक शिक्षा देना अनिवार्य है। 2010 में यह कानून बनने के बाद भी बीएमसी ने 2014 तक आठवीं तक की शिक्षा के लिए कोई खास इंतजाम नहीं किया। चेंबूर में वाशी नाका के पास स्थित अयोध्या म्युन्सिपल स्कूल में बीएमसी को आठवी कक्षा शुरु करने के लिए पत्र भी लिखा था, लेकिन बीएमसी ने इस ओर कोई भी ध्यान नहीं दिया गया। 

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जिसके कारण 7वीं के बाद 75 गरिब विद्यार्थियों को 2013 में स्कूल छोड़ना पड़ा था और 10000 रुपये डोनेशन देकर निजी स्कूलो में प्रवेश लेना पडा तो वही 4 विद्यार्थियों की आर्थिक स्थिती खराब होने के कारण उन्होने आगे की पढ़ाई छोड़ दी।विधानसभा में एनसीपी विधायक संजय कदम ने इस बाबत बीएमसी से जानकारी मांगी थी, जिसकी जानकारी बीएमसी ने सही नही दी। शिक्षा विशेषज्ञ श्याम सोनार का कहना है की अभी भी कई जगहो पर बीएमसी स्कूलो में सिर्फ 7वीं तक की पढ़ने की व्यवस्था है। 2010 में आरटीई लागु होने बाद भी अभी तक बीएमसी के कई जगहो पर 8वी तक पढ़ने की व्यवस्था नहीं की है।

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